चंद्र कैलेंडर से चलने वाले व्रत, और उनकी आगे की तारीख़ें।
व्रत चंद्र कैलेंडर से बँधे होते हैं: हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर एकादशी, तेरहवीं पर प्रदोष, कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी, और इसी तरह आगे। तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोण से तय होती है, इसलिए तारीख़ें हर महीने आगे-पीछे खिसकती रहती हैं।
हर पेज पर नई दिल्ली (भारतीय समय) के पंचांग से निकाली गई आगे की तारीख़ें हैं, साथ में तिथि के ख़त्म होने का समय। दूसरे शहरों में कोई तारीख़ कभी एक दिन पहले या बाद भी पड़ सकती है।