भवन को दिशा, पंच महाभूत और वास्तु पुरुष मंडल के अनुरूप बसाने की पारंपरिक पद्धति — स्रोत सहित संदर्भ और आपके अपने घर के लिए गणना किए गए साधन।
अपनी संपत्ति की तस्वीर अपलोड कीजिए। उसके कोने और कमरे चिह्नित कीजिए, और हर ज़ोन प्रणाली — 9 ज़ोन, 16 ज़ोन, 32 पद द्वार, मर्म बिंदु — सीधे आपके असली नक़्शे पर दिख जाएगी।
अपना द्वार और कमरे उनके ज़ोन में रखिए और स्रोत सहित पूरी वास्तु रिपोर्ट बनाइए — 9 ज़ोन का फल, 32 पद द्वार विश्लेषण, चाहें तो 16 ज़ोन की बारीकी, दोष और उपाय। मुफ़्त, नक़्शे की ज़रूरत नहीं।
वह शास्त्रीय 45 देवता ग्रिड जिस पर हर वास्तु विचार टिका है — बाहर के 32 और भीतर के 13 पद-देवता, स्रोत सहित और नामों के हर दर्ज मतभेद के साथ।
32 पद के मुख्य द्वार की पूरी संदर्भ सूची — चारों दीवारों की हर स्थिति, बृहत् संहिता का शास्त्रीय फल, और उसके साथ आज का प्रचलित मत।
मंडल के मर्म बिंदु — हर पद का केंद्र, और छह शास्त्रीय नामों वाली विकर्ण रेखाओं से बनने वाले नौ अतिमर्म बिंदु, ज्यामिति से निकाले और चित्र पर दिखाए गए।
सलाहकार स्वयं आपकी संपत्ति पर आते हैं — अभी दिल्ली-एनसीआर और अमृतसर में, भूखंड के आकार के अनुसार मूल्य पहले से प्रकाशित, और बाद में लिखित रिपोर्ट।
वास्तु शास्त्र भवन निर्माण की पारंपरिक भारतीय पद्धति है — भवन को किस दिशा में और किस तरह बसाया जाए, ताकि वह आठों दिशाओं, पंच महाभूतों और वास्तु पुरुष मंडल के अनुरूप रहे। मंडल वह प्रतीकात्मक ग्रिड है जिसे हर भूखंड के नीचे बसे वास्तु पुरुष का रूप माना जाता है।
मूल नियम, जिन पर लगभग सब सहमत हैं, सरल हैं: ईशान कोण हल्का, खुला और नीचा रखिए; नैऋत्य भारी, ऊँचा और स्थिर; केंद्र यानी ब्रह्मस्थान खाली रखिए; और अग्नि (रसोई) तथा जल को इस तरह रखिए कि वे एक ही कोने में न आएँ। बाक़ी सब — कमरों की जगह, द्वार की ठीक स्थिति, और मौजूदा दोषों के उपाय — इसी नींव पर खड़ा होता है।
वास्तु शास्त्र भवन निर्माण की पारंपरिक भारतीय पद्धति है — भवन को किस दिशा में और किस तरह बसाया जाए, ताकि वह आठों दिशाओं, पंच महाभूतों और वास्तु पुरुष मंडल के अनुरूप रहे। मंडल वह प्रतीकात्मक ग्रिड है जिसे हर भूखंड के नीचे बसे वास्तु पुरुष का रूप माना जाता है।