वास्तु संदर्भ
मुख्य द्वार वास्तु
किसी भी भूखंड की हर दीवार आठ बराबर पदों में बँटती है — चार दीवारें × आठ = 32 सम्भव मुख्य-द्वार स्थान, और हर स्थान का अपना पद-देवता। शास्त्रीय फल बृहत् संहिता से लिया गया है; उसके साथ आधुनिक व्यावसायिक पाठ भी दिया गया है।
ये फल कहाँ से आए हैं
पद ईशान कोण से गिने जाते हैं
| पद | देवता | शास्त्रीय (बृहत् संहिता) | आधुनिक मत |
|---|---|---|---|
| E1 | अग्नि (शिखी) | अशुभ Injury from fire. | अशुभ आग और दुर्घटना का ख़तरा। |
| E2 | पर्जन्य | मिश्र Birth of daughters (not itself inauspicious, but read as non-ideal by the classical convention favouring sons). | अशुभ व्यर्थ ख़र्च। |
| E3 | जयंत | शुभ Gain of immense wealth. | शुभ धन और सफलता। |
| E4 | इंद्र (महेंद्र) | शुभ Friendship of the king. | शुभ सरकारी और आधिकारिक कृपा। |
| E5 | सूर्य (रवि) | अशुभ Increase of anger. | अशुभ आक्रामकता, शीघ्र क्रोध। |
| E6 | सत्य | अशुभ The vice of lying. | अशुभ घर में असत्य का व्यवहार। |
| E7 | भृश | अशुभ Cruelty. | अशुभ अकारण क्रोध, वैवाहिक कलह। |
| E8 | अंतरिक्ष (आकाश) | अशुभ Theft. | अशुभ चोरी और दुर्घटना। |
पद आग्नेय कोण से गिने जाते हैं
| पद | देवता | शास्त्रीय (बृहत् संहिता) | आधुनिक मत |
|---|---|---|---|
| S1 | वायु (अनिल) | अशुभ Few sons. | अशुभ पुत्र संतति और नक़दी के प्रवाह पर दबाव। |
| S2 | पूषा | अशुभ Servitude. | अशुभ स्वतंत्र काम के बजाय दूसरों के अधीन रहना। |
| S3 | वितथ | अशुभ Becoming a Chandala (outcaste status) — Brihat Samhita 53.73. | शुभ आधुनिक साइटों का एक समूह इसे "अपार समृद्धि" कहता है — पर वही वाक्य उन सभी साइटों पर लगभग शब्दशः दोहराया गया है, जिससे लगता है कि ये सब एक ही द्वितीयक संकलन से उतरे हैं, स्वतंत्र पुष्टि से नहीं। विवादित — यहाँ दोनों स्रोत अलग कहते हैं |
| S4 | गृहक्षत (बृहत्क्षत) | मिश्र Excessive eating and drinking, with an increase of sons. | शुभ यश और समृद्धि — आधुनिक स्रोत शास्त्रीय दोष छोड़ देते हैं और केवल शुभ आधा ही रखते हैं। विवादित — यहाँ दोनों स्रोत अलग कहते हैं |
| S5 | यम | अशुभ Anger. | अशुभ रोग और ऋण। |
| S6 | गंधर्व | अशुभ Ingratitude. | अशुभ निर्धनता। |
| S7 | भृंगराज | अशुभ Poverty. | अशुभ व्यर्थ परिश्रम, धन की हानि। |
| S8 | मृग | अशुभ Loss of sons and valour. | अशुभ भारी आर्थिक हानि (अधिकांश स्रोतों का मत)। |
पद नैऋत्य कोण से गिने जाते हैं
| पद | देवता | शास्त्रीय (बृहत् संहिता) | आधुनिक मत |
|---|---|---|---|
| W1 | पितृ | अशुभ Suffering of sons. | अशुभ निर्धनता — लगभग सभी स्रोत इसे सबसे बुरे द्वार-स्थानों में गिनते हैं। |
| W2 | दौवारिक | अशुभ Increase of the enemy. | अशुभ आजीविका और संबंधों में अस्थिरता। |
| W3 | सुग्रीव | अशुभ Want of wealth and sons. | शुभ आधुनिक साइटों का एक समूह इसे "सर्वाधिक शुभ" द्वारों में बताता है, व्यापारियों के लिए आदर्श — वही एक-स्रोत-से-उतरने की चेतावनी यहाँ भी लागू है जो वितथ (S3) पर दी गई है। विवादित — यहाँ दोनों स्रोत अलग कहते हैं |
| W4 | पुष्पदंत (कुसुमदंत) | शुभ Increase of sons, wealth, and strength. | शुभ आर्थिक स्थिरता। |
| W5 | वरुण | शुभ Opulence. | शुभ समृद्धि, पर कुछ आधुनिक स्रोत अति-महत्वाकांक्षा का जोखिम भी बताते हैं। |
| W6 | असुर | अशुभ Fear from kings (authority). | अशुभ थकान, मन का उतरा रहना। |
| W7 | शेष (शोष) | अशुभ Loss of wealth. | अशुभ दुर्बलता, व्यसन की ओर झुकाव। |
| W8 | पापयक्ष्मा | अशुभ Disease. | अशुभ त्वचा रोग, अनुचित साधनों से आय। |
पद वायव्य कोण से गिने जाते हैं
| पद | देवता | शास्त्रीय (बृहत् संहिता) | आधुनिक मत |
|---|---|---|---|
| N1 | रोग | अशुभ Increase of cruelty among kinsmen. | अशुभ रोग और शत्रुता — यह देवता के नाम से ही मेल खाता है (रोग = "बीमारी")। |
| N2 | अहि (नाग) | अशुभ Increase of the enemy. | अशुभ शत्रुता और ईर्ष्या। |
| N3 | मुख्य | शुभ Gain of wealth and sons. | शुभ मनोकामना की पूर्ति। |
| N4 | भल्लाट | शुभ Possession of all virtues. | शुभ धन (अधिकांश स्रोतों का मत)। |
| N5 | सोम | शुभ Acquisition of sons and wealth. | शुभ लाभ और आध्यात्मिक उन्नति — उत्तर कुबेर की, यानी धन की दिशा है, और सोम उसे और बल देते हैं। |
| N6 | भुजग | अशुभ Hatred among sons. | अशुभ स्वास्थ्य संबंधी कष्ट। |
| N7 | अदिति | अशुभ Loss of the women's character/reputation. | अशुभ घर की स्त्रियों से जुड़ा कलह। |
| N8 | दिति | अशुभ Loss of wealth. | मिश्र आधुनिक स्रोत इसे नरम करके "बचत, पर N3–N5 से कमज़ोर" कह देते हैं — शास्त्रीय पाठ से यह वास्तविक, पर छोटा अंतर है। विवादित — यहाँ दोनों स्रोत अलग कहते हैं |
ध्यान देंये शास्त्रीय और आधुनिक, दोनों फल वैसे ही दिए गए हैं जैसे स्रोतों में दर्ज हैं, केवल संदर्भ के लिए। इनसे यहाँ कोई अंक, प्रतिशत या कुल निर्णय नहीं निकाला जाता। शास्त्रीय स्तंभ बृहत् संहिता के एक अंग्रेज़ी अनुवाद (एम. रामकृष्ण भट) से लिया गया उद्धरण है, और अनुवादक के अपने शब्दों में ही रखा गया है — ताकि श्रेय उन्हीं का रहे।
संदर्भ तालिका केवल स्थानों के नाम बताती है; परामर्श उन्हें आपकी असली संपत्ति पर तौलता है।