दशावतार का दिव्य महत्व, मंत्र और स्वरूप-विज्ञान देखें।
नवम अवतार पर परंपराओं में वास्तविक मतभेद है: अधिकांश प्रमुख स्रोत बुद्ध को गिनते हैं, जबकि श्रीवैष्णव, स्मार्त और कुछ क्षेत्रीय परंपराएँ उनके स्थान पर बलराम को गिनती हैं (और कृष्ण को अष्टम कर देती हैं)। ऊपर दोनों को नवम के रूप में दिखाया गया है, किसी एक को अंतिम सत्य बताने के बजाय। सुप्रतिष्ठित मंत्रों (मत्स्य, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण) के अतिरिक्त कई अवतारों का कोई एक प्रचलित संक्षिप्त मंत्र नहीं है, इसलिए उन्हें गढ़ने के बजाय रिक्त छोड़ा गया है।